प्राचीन काल का वृत्तान्त है, कुण्डिन नामक एक भव्य नगर था। उस नगर में धर्मपाल नामक एक धनिक निवास करता था।
हे भगवान शिव! यदि कुलीन स्त्रियों को अखण्ड सौभाग्य, महाभाग्य तथा पुत्र-पौत्र आदि का सुख प्रदान करने वाला व्रत हो, तो कृपा करके उसका वर्णन करें?
भगवान श्री कृष्ण धर्मराज युधिष्ठिर से कहते हैं, "हे पार्थ! प्राचीनकाल में महोदय नाम का एक वैश्य था।
हिन्दु पञ्चाङ्ग के अनुसार, ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष नवमी को महेश नवमी के रूप में मनाया जाता है। महेश नवमी से सम्बन्धित विभिन्न पौराणिक कथायें प्रचलित हैं।
कालान्तर में एक समय चैत्र माह की शुक्ल पक्ष के तृतीया तिथि के दिन माता पार्वती जी भगवान शिव से आज्ञा ग्रहण कर नदी में स्नान हेतु गयीं।
भगवान शिव हिन्दु धर्म के सर्वोच्च आराध्य देवताओं में से हैं। शिव जी की पूजा न केवल भोग अपितु परमदुर्लभ मोक्ष गति देने में सक्षम है।
हरतालिका तीज की कथा स्वयं भगवान शिव ने देवी पार्वती को उनके शैलपुत्री अवतार का स्मरण कराते हुये सुनायी थी।
कालान्तर में एक गाँव में एक कुम्हार निवास करता था। वह मिट्टी के अत्यन्त सुन्दर पात्र बनाता था तथा उन्हें भट्टी में पकाकर कठोर करता था।
यद्यपि, रक्षा बन्धन से सम्बन्धित विभिन्न पौराणिक कथायें प्रचलित हैं, किन्तु भविष्य पुराण में वर्णित कथा को सर्वाधिक प्रमाणित माना जाता है।
Kumbh Mela Katha – कुम्भ मेला की कथा कुम्भ मेला की पौराणिक कथायें – समुद्रमन्थन से प्राप्त अमृत कलश की कथा हिन्दु धर्म ग्रन्थों में प्राप्त वर्णन के अनुसार, समुद्रमन्थन एक अत्यन्त दुर्गम कार्य था। यह कठिन कार्य असुरों की सहायता के बिना सम्भव नहीं था। अतः समस्त देवगण, असुरों के समक्ष यह समझौता करने हेतु गये कि, समुद्रमन्थन से प्राप्त होने वाले सभी दिव्य रत्न देव एवं दानवों में समान मात्रा में वितरित किये जायेंगे। उन रत्नों में दिव्य अमृत भी सम्मिलित था। समुद्रमन्थन से अमृत कुम्भ प्रकट होते ही देवताओं एवं दानवों में अमृत कुम्भ पर एकाधिकार करने…


