ऊँ जय सूर्य भगवान, जय हो दिनकर भगवान। जगत् के नेत्र स्वरूपा, तुम हो त्रिगुण स्वरूपा। धरत सब ही तव ध्यान, ऊँ जय सूर्य भगवान।।
जय बृहस्पति देवा, ऊँ जय बृहस्पति देवा । छि छिन भोग लगाऊँ, कदली फल मेवा ॥
जय जय श्री शनिदेव भक्तन हितकारी। सूरज के पुत्र प्रभु छाया महतारी॥ जय.॥
आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्णमुरारी की ॥ गले में बैजंती माला, बजावै मुरली मधुर बाला।
ॐ जय श्री कृष्ण हरे, प्रभु जय श्री कृष्ण हरे भक्तन के दुख टारे पल में दूर करे. जय जय श्री कृष्ण हरे….
ॐ जय लक्ष्मीरमणा स्वामी जय लक्ष्मीरमणा । सत्यनारायण स्वामी, जन पातक हरणा रत्नजडित सिंहासन, अद्भुत छवि राजें ।
ॐ जय जगदीश हरे, प्रभु! जय जगदीश हरे। भक्तजनों के संकट, छन में दूर करे॥ ॐ जय जगदीश हरे
Aarti Shri Ram Ji Ki – श्री रामचंद्र जी की आरती !!आरती भगवान श्री रामचंद्रजी की!! श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भव भय दारुणम्।नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।। कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्।पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्।। भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्।रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्।। सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं।आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर-धूषणं।। इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।मम ह्रदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम्।। मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों।करुना…
Shree Hanuman Ji Ki Aarti – श्री हनुमान जी की आरती !!श्री हनुमान जी की आरती!! आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।। जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके।। अंजनि पुत्र महाबलदायी। संतान के प्रभु सदा सहाई।। दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारी सिया सुध लाए।। लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई।। लंका जारी असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे।। लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आणि संजीवन प्राण उबारे।। पैठी पताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखाड़े।। बाएं भुजा असुर दल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे।। सुर-नर-मुनि जन…
Shiv Ji Ki Aarti – शिवजी की आरती कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारं ।सदा वसन्तं ह्रदयाविन्दे भंव भवानी सहितं नमामि ॥ जय शिव ओंकारा हर ॐ शिव ओंकारा ।ब्रम्हा विष्णु सदाशिव अद्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव ओंकारा…… एकानन चतुरानन पंचांनन राजे ।हंसासंन, गरुड़ासन, वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव ओंकारा…… दो भुज चारु चतुर्भज दस भुज अति सोहें ।तीनों रुप निरखता त्रिभुवन जन मोहें॥ ॐ जय शिव ओंकारा…… अक्षमाला, बनमाला, रुण्ड़मालाधारी ।चंदन, मृदमग सोहें, भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव ओंकारा…… श्वेताम्बर, पीताम्बर, बाघाम्बर अंगेंसनकादिक, ब्रम्हादिक, भूतादिक संगें॥ ॐ जय शिव ओंकारा…… कर के मध्य कमड़ंल चक्र, त्रिशूल धरता ।जगकर्ता, जगभर्ता,…


