एक समय महाराजा दशरथ महामुनि ऋषि वशिष्ठ से बोले कि, 'हे गुरुवर! हे वेदों के ज्ञाता! मैंने आपके श्रीमुख से दोनों चतुर्थी तिथियों के माहात्म्य युक्त आख्यान का श्रवण किया।
एक समय महाराजा दशरथ महामुनि ऋषि वशिष्ठ से बोले कि, 'हे गुरुवर! हे वेदों के ज्ञाता! मैंने आपके श्रीमुख से दोनों चतुर्थी तिथियों के माहात्म्य युक्त आख्यान का श्रवण किया।