हे महामुनि! मैंने आपके श्रीमुख से फाल्गुन शुक्ल चतुर्थी व्रत का माहात्म्य श्रवण किया, किन्तु उसके श्रावण से भी मुझे तृप्ति नहीं हुयी है।
हे महामुनि! मैंने आपके श्रीमुख से फाल्गुन शुक्ल चतुर्थी व्रत का माहात्म्य श्रवण किया, किन्तु उसके श्रावण से भी मुझे तृप्ति नहीं हुयी है।