श्री शनिश्चर देवजी,सुनहु श्रवण मम् टेर। कोटि विघ्ननाशक प्रभो,करो न मम् हित बेर॥
जय गणेश गिरिजा सुवन,मंगल करण कृपाल। दीनन के दुःख दूर करि,कीजै नाथ निहाल॥
जय गणेश गिरिजा सुवन,मंगल मूल सुजान। कहत अयोध्यादास तुम,देहु अभय वरदान॥
जय गणपति सदगुण सदन,कविवर बदन कृपाल। विघ्न हरण मंगल करण,जय जय गिरिजालाल॥
निश्चय प्रेम प्रतीति ते,बिनय करै सनमान। तेहि के कारज सकल शुभ,सिद्ध करै हनुमान॥
आरती श्री रामायण जी की। कीरति कलित ललित सिया-पी की॥
ॐ जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता। विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता॥
श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी। राजेश्वरी जय नमो नमः॥
ॐ जय गंगे माता, मैया जय गंगे माता। जो नर तुमको ध्याता, मनवांछित फल पाता॥ ॐ जय गंगे माता॥
सब योगों के ऊपर, सब रोगों के ऊपर, रुज से रक्षा करके भव त्राता।






