Sarvashail (Rakini) Shakti Peeth – सर्वशैल (राकिनी) शक्ति पीठ स्थान: राजमुंदरी, आंध्र प्रदेश शक्ति की पूजा की जाती है: माँ राकिनी भैरव की पूजा इस प्रकार की जाती है: वत्सनाभ शारीरिक भाग: गाल निकटतम हवाई अड्डा: राजमुंदरी हवाई अड्डा सर्वशैल या राकिनी शक्ति पीठ राजमुंदरी में गोदावरी नदी के तट पर स्थित है। ऐसा माना जाता है कि यह वह स्थान है जहां सती के गाल गिरे थे, यह एक शांतिपूर्ण और आध्यात्मिक रूप से ऊर्जावान स्थल है जो शक्ति के उग्र और पोषण करने वाली मां राकिनी को समर्पित है।
Ambika Shakti Peeth – अंबिका शक्ति पीठ स्थान: भरतपुर, राजस्थान पूजा जाने वाली शक्ति: माँ अंबिका पूजा जाने वाला भैरव: अमृतेश्वर शरीर का अंग: नाभि निकटतम हवाई अड्डा: आगरा हवाई अड्डा भरतपुर स्थित अंबिका शक्ति पीठ को वह पवित्र स्थान माना जाता है जहाँ सती की नाभि गिरी थी। माँ अंबिका को समर्पित यह मंदिर भक्ति और आस्था के माध्यम से आध्यात्मिक पोषण और आंतरिक शक्ति की तलाश करने वाले भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
Gayatri Manibandh Shakti Peeth – गायत्री मणिबंध शक्ति पीठ स्थान: पुष्कर, राजस्थान पूजा जाने वाली शक्ति: माँ गायत्री पूजा जाने वाले भैरव: सर्वानंद शरीर का अंग: दोनों कलाइयाँ निकटतम हवाई अड्डा: जयपुर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा पुष्कर के पवित्र नगर में गायत्री मणिबंध शक्ति पीठ स्थित है, जिसे वह स्थान माना जाता है जहाँ सती की कलाइयाँ गिरी थीं। अपने पवित्र सरोवर और आध्यात्मिक वातावरण के लिए प्रसिद्ध, यह मंदिर वैदिक ज्ञान और मंत्रों की देवी माँ गायत्री को समर्पित है।
Ambaji Shakti Peeth – अंबाजी शक्ति पीठ स्थान: बनासकांठा, गुजरात पूजा जाने वाली शक्ति: माँ अम्बा पूजा जाने वाला भैरव: बटुक भैरव शरीर का अंग: हृदय निकटतम हवाई अड्डा: अहमदाबाद हवाई अड्डा राजस्थान-गुजरात सीमा के पास स्थित अंबाजी शक्ति पीठ को सती का हृदय माना जाता है। माँ अम्बा का यह मंदिर एक शक्तिशाली आध्यात्मिक केंद्र और एक प्रमुख तीर्थस्थल है, जो अपने जीवंत उत्सवों और शक्तिशाली ऊर्जा के लिए प्रसिद्ध है।
Janasthan Shakti Peeth – जनस्थान शक्ति पीठ स्थान: नासिक, महाराष्ट्र पूजा जाने वाली शक्ति: माँ भ्रमरी पूजा जाने वाला भैरव: विकृतक्ष शरीर का अंग: ठुड्डी निकटतम हवाई अड्डा: नासिक हवाई अड्डा पवित्र नगर नासिक में स्थित जनस्थान शक्ति पीठ को वह स्थान माना जाता है जहाँ सती की ठुड्डी गिरी थी। आध्यात्मिक इतिहास और पौराणिक कथाओं से घिरा यह पीठ दिव्य वाणी और संवाद का प्रतीक है, और यहाँ माँ भ्रमरी के रूप में पूजा जाता है।
Mithila Shakti Peeth – मिथिला शक्ति पीठ स्थान: दरभंगा, बिहार पूजी जाने वाली शक्ति: माँ उमा पूजा जाने वाला भैरव: महोदर शरीर का अंग: बायाँ कंधा निकटतम हवाई अड्डा: दरभंगा हवाई अड्डा मिथिला शक्ति पीठ, सांस्कृतिक रूप से समृद्ध दरभंगा क्षेत्र में स्थित है, जहाँ माना जाता है कि सती का बायाँ कंधा गिरा था। पौराणिक महत्व के लिए प्रसिद्ध, यह मंदिर देवी पूजा और मिथिला की परंपराओं से गहराई से जुड़ा हुआ है।
Patan Devi Shakti Peeth – पाटन देवी शक्ति पीठ स्थान: पटना, बिहार पूजी जाने वाली शक्ति: माँ सर्वानंदकारी पूजे जाने वाले भैरव: वैद्यनाथ शरीर का अंग: दाहिनी जांघ निकटतम हवाई अड्डा: जय प्रकाश नारायण पटना के मध्य में स्थित पाटन देवी शक्ति पीठ शहर के सबसे प्राचीन मंदिरों में से एक है, माना जाता है कि यहीं सती की दाहिनी जांघ गिरी थी। यह मंदिर नारी शक्ति का प्रतीक है और शक्ति भक्तों के बीच इसका बहुत महत्व है।
Savitri Shakti Peeth – सावित्री शक्ति पीठ स्थान: कुरुक्षेत्र, हरियाणा पूजी जाने वाली शक्ति: माँ सावित्री पूजे जाने वाले भैरव: ईश्वर शरीर का अंग: हथेली निकटतम हवाई अड्डा: चंडीगढ़ हवाई अड्डा कुरुक्षेत्र स्थित सावित्री शक्ति पीठ वह स्थान है जहाँ माना जाता है कि सती की हथेली गिरी थी। अपने आध्यात्मिक वातावरण के लिए पूजनीय यह मंदिर महाभारत की पवित्र भूमि में ज्ञान, प्रेरणा और माँ सावित्री का आशीर्वाद पाने के लिए भक्तों को आकर्षित करता है।
Tripurmalini Shakti Peeth – त्रिपुरमालिनी शक्ति पीठ स्थान: जालंधर, पंजाब पूजी जाने वाली शक्ति: माँ त्रिपुरमालिनी पूजा जाने वाला भैरव: भीषण शरीर का अंग: बायां स्तन निकटतम हवाई अड्डा: लुधियाना हवाई अड्डा त्रिपुरमालिनी शक्ति पीठ को वह पवित्र स्थान माना जाता है जहाँ सती जी का बायां स्तन गिरा था। जालंधर में स्थित यह मंदिर अत्यंत धार्मिक महत्व रखता है और प्रेम, देखभाल और दिव्य शक्ति का प्रतीक माँ त्रिपुरमालिनी को समर्पित है।
Jwala Devi Shakti Peeth – ज्वाला देवी शक्ति पीठ स्थान: कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश पूजा जाने वाली शक्ति: माँ ज्वाला पूजा जाने वाला भैरव: उन्मत्त भैरव शरीर का अंग: जीभ निकटतम हवाई अड्डा: गग्गल हवाई अड्डा, कांगड़ा ज्वाला देवी शक्ति पीठ सबसे शक्तिशाली और रहस्यमय मंदिरों में से एक है, जो बिना ईंधन के प्राकृतिक रूप से जलती हुई शाश्वत लौ के लिए प्रसिद्ध है। यह वह स्थान है जहाँ सती की जीभ गिरी थी और यह देवी की प्रचंड ऊर्जा का प्रतीक एक प्रमुख तीर्थ स्थल है।


