श्री भैरव सङ्कट हरन,मंगल करन कृपालु। करहु दया जि दास पे,निशिदिन दीनदयालु॥
विश्वनाथ को सुमिर मन,धर गणेश का ध्यान। भैरव चालीसा रचूं,कृपा करहु भगवान॥
जय ब्रह्मा जय स्वयम्भू,चतुरानन सुखमूल। करहु कृपा निज दास पै,रहहु सदा अनुकूल॥
विष्णु सुनिए विनय,सेवक की चितलाय। कीरत कुछ वर्णन करूँ,दीजै ज्ञान बताय॥
कनक बदन कुण्डल मकर,मुक्ता माला अङ्ग। पद्मासन स्थित ध्याइए,शंख चक्र के सङ्ग॥
श्री रघुबीर भक्त हितकारी।सुनि लीजै प्रभु अरज हमारी॥ निशि दिन ध्यान धरै जो कोई।ता सम भक्त और नहीं होई॥
बंशी शोभित कर मधुर,नील जलद तन श्याम। अरुण अधर जनु बिम्बा फल,पिताम्बर शुभ साज॥
बंशी शोभित कर मधुर,नील जलद तन श्याम। अरुण अधर जनु बिम्बा फल,पिताम्बर शुभ साज॥
श्री शनिश्चर देवजी,सुनहु श्रवण मम् टेर। कोटि विघ्ननाशक प्रभो,करो न मम् हित बेर॥
जय गणेश गिरिजा सुवन,मंगल करण कृपाल। दीनन के दुःख दूर करि,कीजै नाथ निहाल॥


