जय जय सीताराम के,मध्यवासिनी अम्ब। देहु दर्श जगदम्ब,अब करो न मातु विलम्ब॥
जय काली जगदम्ब जय,हरनि ओघ अघ पुंज। वास करहु निज दास के,निशदिन हृदय निकुंज॥
नमो नमो विन्ध्येश्वरी,नमो नमो जगदम्ब। सन्तजनों के काज में,माँ करती नहीं विलम्ब॥
जय-जय माता शीतला,तुमहिं धरै जो ध्यान। होय विमल शीतल हृदय,विकसै बुद्धि बलज्ञान॥
जय जय तुलसी भगवती,सत्यवती सुखदानी। नमो नमो हरि प्रेयसी,श्री वृन्दा गुन खानी॥
जयति जयति जय ललिते माता।तव गुण महिमा है विख्याता॥ तू सुन्दरी, त्रिपुरेश्वरी देवी।सुर नर मुनि तेरे पद सेवी॥
जनक जननि पद कमल रज,निज मस्तक पर धारि। बन्दौं मातु सरस्वती,बुद्धि बल दे दातारि॥
जय जय जय जग पावनी,जयति देवसरि गंग। जय शिव जटा निवासिनी,अनुपम तुंग तरंग॥
जय जय श्री महालक्ष्मी,करूँ मात तव ध्यान। सिद्ध काज मम किजिये,निज शिशु सेवक जान॥
मातु लक्ष्मी करि कृपा,करो हृदय में वास। मनोकामना सिद्ध करि,परुवहु मेरी आस॥


