श्री गुरु पद पंकज नमन,दूषित भाव सुधार। राणी सती सुविमल यश,बरणौं मति अनुसार॥
अलख निरंजन आप हैं,निरगुण सगुण हमेश। नाना विधि अवतार धर,हरते जगत कलेश॥
श्री गुरु चरण ध्यान धर,सुमिरि सच्चिदानन्द। श्याम चालीसा भणत हूँ,रच चैपाई छन्द॥
गणपति की कर वंदना,गुरु चरनन चितलाय। प्रेतराज जी का लिखूं,चालीसा हरषाय॥
शीश नवा अरिहन्त को,सिद्धन करूँ प्रणाम। उपाध्याय आचार्य का,ले सुखकारी नाम॥
सुवन केहरी जेवर,सुत महाबली रनधीर। बन्दौं सुत रानी बाछला,विपत निवारण वीर॥
गणपति गिरजा पुत्र को,सुमिरूँ बारम्बार। हाथ जोड़ बिनती करूँ,शारद नाम आधार॥
बंदौं वीणा पाणि को,देहु आय मोहिं ज्ञान। पाय बुद्धि रविदास को,करौं चरित्र बखान॥
पहले साई के चरणों में,अपना शीश नमाऊं मैं। कैसे शिरडी साई आए,सारा हाल सुनाऊं मैं॥
बन्दउ माँ शाकम्भरी,चरणगुरु का धरकर ध्यान। शाकम्भरी माँ चालीसा का,करे प्रख्यान॥



