श्री गुरु चरन सरोज रज,निज मनु मुकुर सुधारि। बरनउं रघुबर विमल जसु,जो दायकु फल चारि॥
जय अम्बे गौरी, मैया जय श्यामा गौरी । तुम को निस दिन ध्यावत मैयाजी को निस दिन ध्यावत हरि ब्रह्मा शिवजी ।। जय अम्बे गौरी ॥
Aarti Shri Ram Ji Ki – श्री रामचंद्र जी की आरती !!आरती भगवान श्री रामचंद्रजी की!! श्री राम चंद्र कृपालु भजमन हरण भव भय दारुणम्।नवकंज लोचन कंज मुखकर, कंज पद कन्जारुणम्।। कंदर्प अगणित अमित छवी नव नील नीरज सुन्दरम्।पट्पीत मानहु तडित रूचि शुचि नौमी जनक सुतावरम्।। भजु दीन बंधु दिनेश दानव दैत्य वंश निकंदनम्।रघुनंद आनंद कंद कौशल चंद दशरथ नन्दनम्।। सिर मुकुट कुण्डल तिलक चारु उदारू अंग विभूषणं।आजानु भुज शर चाप धर संग्राम जित खर-धूषणं।। इति वदति तुलसीदास शंकर शेष मुनि मन रंजनम्।मम ह्रदय कुंज निवास कुरु कामादी खल दल गंजनम्।। मनु जाहिं राचेऊ मिलिहि सो बरु सहज सुंदर सावरों।करुना…
Shree Hanuman Ji Ki Aarti – श्री हनुमान जी की आरती !!श्री हनुमान जी की आरती!! आरती कीजै हनुमान लला की। दुष्ट दलन रघुनाथ कला की।। जाके बल से गिरिवर कांपे। रोग दोष जाके निकट न झांके।। अंजनि पुत्र महाबलदायी। संतान के प्रभु सदा सहाई।। दे बीरा रघुनाथ पठाए। लंका जारी सिया सुध लाए।। लंका सो कोट समुद्र सी खाई। जात पवनसुत बार न लाई।। लंका जारी असुर संहारे। सियारामजी के काज संवारे।। लक्ष्मण मूर्छित पड़े सकारे। आणि संजीवन प्राण उबारे।। पैठी पताल तोरि जमकारे। अहिरावण की भुजा उखाड़े।। बाएं भुजा असुर दल मारे। दाहिने भुजा संतजन तारे।। सुर-नर-मुनि जन…
Shree Laxmi Maa Aarti : श्री लक्ष्मी माता की आरती महालक्ष्मी नमस्तुभ्यं, नमस्तुभ्यं सुरेश्वरी ।हरिप्रिये नमस्तुभ्यं, नमस्तुभ्यं दयानिधे ॥ ॐ जय लक्ष्मी माता मैया जय लक्ष्मी माता ।तुमको निसदिन सेवत, हर विष्णु विधाता ॥ॐ जय लक्ष्मी माता…. उमा, रमा, ब्रम्हाणी, तुम जग की माता ।सूर्य चद्रंमा ध्यावत, नारद ऋषि गाता ॥ॐ जय लक्ष्मी माता…. दुर्गारुप निरंजन, सुख संपत्ति दाता ।जो कोई तुमको ध्याता, ऋद्धि सिद्धि धन पाता ॥ॐ जय लक्ष्मी माता…. तुम ही पाताल निवासनी, तुम ही शुभदाता ।कर्मप्रभाव प्रकाशनी, भवनिधि की त्राता ॥ॐ जय लक्ष्मी माता…. जिस घर तुम रहती हो, ताँहि में हैं सद् गुण आता।सब सभंव हो जाता,…
Shiv Ji Ki Aarti – शिवजी की आरती कर्पूरगौरं करुणावतारं संसारसारं भुजगेन्द्रहारं ।सदा वसन्तं ह्रदयाविन्दे भंव भवानी सहितं नमामि ॥ जय शिव ओंकारा हर ॐ शिव ओंकारा ।ब्रम्हा विष्णु सदाशिव अद्धांगी धारा ॥ ॐ जय शिव ओंकारा…… एकानन चतुरानन पंचांनन राजे ।हंसासंन, गरुड़ासन, वृषवाहन साजे॥ ॐ जय शिव ओंकारा…… दो भुज चारु चतुर्भज दस भुज अति सोहें ।तीनों रुप निरखता त्रिभुवन जन मोहें॥ ॐ जय शिव ओंकारा…… अक्षमाला, बनमाला, रुण्ड़मालाधारी ।चंदन, मृदमग सोहें, भाले शशिधारी ॥ ॐ जय शिव ओंकारा…… श्वेताम्बर, पीताम्बर, बाघाम्बर अंगेंसनकादिक, ब्रम्हादिक, भूतादिक संगें॥ ॐ जय शिव ओंकारा…… कर के मध्य कमड़ंल चक्र, त्रिशूल धरता ।जगकर्ता, जगभर्ता,…
Shri Ganesh Aarti – श्री गणेश आरती जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवामाता जाकी पार्वती पिता महादेवा ॥ जय … एक दंत दयावंत चार भुजा धारी।माथे सिंदूर सोहे मूसे की सवारी ॥ जय … अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।बांझन को पुत्र देत, निर्धन को माया ॥ जय … पान चढ़े फल चढ़े और चढ़े मेवा।लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा ॥ जय … ‘सूर’ श्याम शरण आए सफल कीजे सेवाजय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा ॥ जय …





